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تكيه كرده آسمان، تا
به دست هاي تو |
چشم خسته ي زمين،
مانده پيش پاي |
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حجم سرد تشنگي، ماند
بر لب عطش |
چشم كودكان به راه،
دست بر دعاي تو |
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شعله مي زند چرا،
قلب تشنه ي فرا؟ |
آه اگر كه بشكند
حرمت خداي تو |
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بر دو دست گل زند
بوسه خار ناكسي |
تا محك زند به تيغ،
صولت وفاي تو |
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تكه تكه مي كند وسعت
نگاه عشق |
زخم سينه سوز آن چشم
دلرباي تو |
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پشت آينه شكست، قامت
گلي خميد |
از غروب ماه دل ذكر
يا اخاي تو |
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بر گلوي آينه، بغض
خنجري نشست |
با عروج زخمي صوت
ربناي تو |
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بر نگاه آخرت آب
سجده كرده است |
مي كند نماز عشق، دل
به اقتداي تو |
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چشم و آب و آينهف
ديده ودل و غزل |
اي تجلي وفا، جملگي
فداي تو |
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در هجوم قحطي مردي و
وفا و عشق |
باز مي كند زمان
تكيه بر لواي تو |
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مرضيه طالبي |
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رسالت |
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